Wednesday, 6 July 2016

सुरः फातिहा की फजीलत

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۞"अबु हुरैरह रजि. से रिवायत है की रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया,"जिस ने नमाज पढ़ी और इसमें कुरआन (सूरह फातिहा) ना पढ़ी तो उसकी नमाज नाकिस (अधूरी है, पूरी नहीं) है।
कहा इसको तीन बार,नही पूरी होती (नमाज बिना फातिहा के)
अबु हुरैरह रजि. से पूछा गया की हम इमाम के पीछे होते है तो?
आप (रजि.) ने फ़र्माया (हाँ) पढ़  अपने आप में
/"فِي نَفْسِك"َ}
Yourself/मन में},
क्योंकि  मैंने रसूलुल्लाह (ﷺ) से सुना है की अल्लाह तआला ने फ़र्माया नमाज मेरे और बन्दे के दरमियान आधी तक़सीम हो गई है,और जो मेरा बन्दा जो भी मांगेगा उसे वही मिलेगा।
चुनाँचे बन्दा जब कहता है,
"الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ‏"
(तमाम तारीफ़ अल्लाह ही के लिये है जो तमाम क़ायनात का रब है)
तो अल्लाह तआला फर्माता है "मेरा बन्दा मेरी प्रशंसा (तारीफ़) करता है।"
और जब वह (बन्दा) कहता है,
"‏ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ‏"
(वह मेहरबान,रहम करने वाला है)
तो अल्लाह तआला फरमाता है "मेरे बन्दे ने मेरी खूबी (गुणगान) बयान करता है"
वह (बन्दा) कहता है,
" مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ"
(बदले के दिन का मालिक)
तो अल्लाह तआला फरमाता है "बन्दे ने मेरी खूबी और बुजुर्गी बयान की और कभी फरमाता है के बन्दा ने अपने कामो को मेरे सुपुर्द कर दिया"
वह (बन्दा) कहता है,
"إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ"
(हम सिर्फ तेरी ही इबादत करते है और सिर्फ तुझ ही से मदद चाहते है)
तो अल्लाह तआला फरमाता है "ये मेरे और बन्दे के बीच है और मेरे बन्दे को जो वो मांगे मिलेगा"
वह (बन्दा) कहता है,
" اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ"

" صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلاَ الضَّالِّينَ"
(हमें सीधे रास्ते की हिदायत दे।
उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम फ़रमाया, जो माअतूब नहीं हुए, जो भटके हुए नहीं है।)
अल्लाह तआला फरमाता है "ये मेरे बन्दे के लिए है और जो वो मांगे इसे वही मिलेगा"
✨Reference  : Sahih Muslim 395
(878)

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